Saturday, June 12, 2010

चलो चले ऐसी बस्तीमें

चलो चले ऐसी बस्तीमें
जहा कोई हमारा नाम न पूछे,
जात न पूछे, धर्म न पूछे,
चलो चले ऐसी बस्तीमें...
अब जीनेमें वो बात नहीं,
आपनोमें जसबात नहीं।
वो सुकून नहीं वो चैन नहीं,
जाहेंनमें एक दबी सी आग है,
आंख़े नम है, दिलमे घुटन है,
चलो चले ऐसी बस्तीमें।
ऐ धर्मोके ठेकेदारो,
ऐ इमांनके रखवालो,
ऐ अमनके रहेजन शतानो,
ऐ दिलकी तस्सलिको रोंदनेवालो,
निकल पड़ेगी जहनकी दबी आग,
कैसे रहे अब इस बस्तीमें ,
चलो चले ऐसी बस्तीमें,
जहा कोई हमारा नाम न पूछे,
जात न पूछे, धर्म न पूछे,
शायद अमन वाही मील जाये।

Written by: Lalitaji Krishnaswami

No comments: